सनातन🚩समाचार🌎 पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची उठापटक अब पार्टी के खजाने तक जा पहुंची है। राज्य के एक निजी बैंक में मौजूद तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों पर पुलिस ने डेबिट फ्रीज लगा दिया है। इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि जमा है। इस कार्रवाई के बाद से पार्टी के वित्तीय संचालन पर पूरी तरह रोक लग गई है और पार्टी के दो गुटों के बीच चल रहा वर्चस्व का संघर्ष अब कानूनी जांच के दायरे में आ गया है।
यह प्रशासनिक कदम बागी विधायकों के उस समूह की शिकायत के बाद उठाया गया है, जो रिताब्रत बनर्जी के समर्थकों के रूप में सक्रिय हैं। इन विधायकों ने बिधाननगर पुलिस के साइबर क्राइम थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें खातों में जमा धन के स्रोतों की गहन जांच की मांग की गई थी। पुलिस के आदेश के मुताबिक, अब इन खातों से किसी भी तरह की निकासी या राशि को दूसरी जगह ट्रांसफर करना संभव नहीं होगा, हालांकि बाहर से पैसा जमा होने की प्रक्रिया जारी रह सकती है।
शिकायत करने वाले विधायकों ने संदेह जताया है कि इन खातों में मौजूद पैसा वैध नहीं है। उन्होंने पुलिस से आग्रह किया है कि वे इस बात की पड़ताल करें कि क्या यह भारी-भरकम फंड सरकारी धन के गबन, अवैध वसूली या विभिन्न घोटालों की कमाई तो नहीं है। विधायकों का तर्क है कि इन रुपयों के लेन-देन का तरीका संदिग्ध है, जिस पर तुरंत कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए।
पार्टी के भीतर इस संकट की शुरुआत नेतृत्व को लेकर मचे घमासान से हुई है। एक तरफ पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास का खेमा है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी के करीबी नेताओं की टीम। हाल ही में अरूप बिस्वास ने भी बैंक को पत्र लिखकर खातों के संचालन पर रोक लगाने की मांग की थी, ताकि नेतृत्व विवाद सुलझने तक किसी भी प्रकार का आर्थिक लेनदेन न हो सके।
विशेष: पानी को व्यर्थ बहाने वाले के घर में शारीरिक, मानसिक या पारिवारिक क्लेश अवश्य होता है।
वहीं, ममता बनर्जी के खेमे के विधायक कुणाल घोष ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि अरूप बिस्वास अब पार्टी के कोषाध्यक्ष नहीं रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जून महीने की शुरुआत में हुई कार्यकारिणी बैठक के दौरान सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष चुना जा चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम ने टीएमसी की संगठनात्मक स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मामला केवल पार्टी के नियंत्रण का नहीं रह गया है, बल्कि वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के चलते पुलिस जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की ओर बढ़ चुका है, जो आने वाले समय में पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकता है।

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Police have imposed a debit freeze on Trinamool Congress (TMC) bank accounts holding ₹440 crore in West Bengal. Following complaints from rebel MLAs, an investigation into the party’s financial sources has been initiated, further deepening the ongoing internal rift.






