पता नहीं इन हैवानो को इतनी क्रूरता करने की प्रेरणा कहां से मिलती है जो ये बूढ़ो युवाओं और बच्चों तक का निर्ममता से कत्ल कर देते हैं ।
सनातन 🚩समाचार🌎 तिरुवनंतपुरम से मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक अत्यंत दुखद मामला प्रकाश में आया है। यहाँ डेढ़ साल के मासूम अर्शिद की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने दरिंदगी की ऐसी भयावह तस्वीर पेश की है जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठे।
मिली जानकारी के अनुसार नन्हे बच्चे के शरीर पर चोट के 91 निशान पाए गए हैं। इस जघन्य हत्याकांड के पीछे बच्चे की मां के लिव-इन पार्टनर अश्कर की क्रूरता सामने आई है, जिसने अपनी बर्बरता से मासूम की जान ले ली। पुलिस ने इस मामले में आरोपी अश्कर और बच्चे की मां अखिला दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बच्चे के सिर और सीने पर घातक प्रहार किए गए थे। आरोपी ने हैवानियत की हदें पार करते हुए मासूम के सीने पर पैर रखकर जोर से दबाया था, जिससे उसकी 7 पसलियां बुरी तरह टूट गईं और शरीर के आंतरिक अंगों को गंभीर क्षति पहुंची। इतना ही नहीं, आरोपी ने बच्चे के नाजुक अंगों और पैरों के तलवों को सिगरेट लाइटर से जलाकर यातनाएं दी थीं।
पुलिस द्वारा की गई पूछताछ के दौरान आरोपी अश्कर ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसने बताया कि वह मासूम अर्शिद को अपने जीवन में बड़ी बाधा मानता था, जिसके चलते वह पिछले एक महीने से उसे लगातार शारीरिक प्रताड़ना दे रहा था। जब भी बच्चा दर्द के कारण रोता था, तो अपनी काली करतूतों को छिपाने के लिए वह उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया करता था।
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जांच में यह भी पता चला कि मासूम के दोनों हाथ पहले से ही टूटे हुए थे और उन पर प्लास्टर चढ़ा हुआ था। आरोपी और बच्चे की मां ने पड़ोसियों को भ्रमित करने के लिए झूठ बोला था कि बच्चा साइकिल से गिरकर घायल हो गया है। पुलिस के अनुसार 24 वर्षीय मां अखिला को अपने बच्चे पर हो रहे इस अमानवीय अत्याचार की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उसने न केवल मूकदर्शक बने रहकर चुप्पी साधी, बल्कि किसी भी तरह से अपने बच्चे की रक्षा करने का कोई प्रयास नहीं किया। मां की इसी संवेदनहीनता और लापरवाही को देखते हुए पुलिस ने उसे भी इस पूरे अपराध में सह-आरोपी बनाया है।







