ये विडंबना ही है कि लगभग सभी पार्टियां हमेशा पीड़ित हिंदुओं को ही अपराधी घोषित करती रहती हैं।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सूर्या चौहान की हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई एक टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि सपा प्रवक्ता ने इस मामले में हत्या के शिकार हुए युवक सूर्या को ही दोषी ठहराने का प्रयास किया है।
अमीक जामेई ने अपनी एक पोस्ट में असद के एनकाउंटर को सूर्या के परिवार के लिए न्याय बताया है। हालांकि उन्होंने इसके साथ ही एक नया तर्क पेश करते हुए कहा कि मृतक सूर्या और आरोपी नाबालिग असद पड़ोसी थे और उनके बीच विवाद की जड़ एक युवती से दोस्ती थी। सपा प्रवक्ता के इस बयान को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे इस हत्या को व्यक्तिगत विवाद का नाम देकर इसे न्यायोचित ठहराने का प्रयास कर रहे हैं ?
आलोचकों का तर्क है कि यदि किन्हीं दो व्यक्तियों के बीच कोई विवाद या संबंध था भी, तो भी कानून हाथ में लेकर किसी की निर्मम हत्या करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा जा रहा है कि राजनीतिक दलों को ऐसे संवेदनशील मामलों में बयानबाजी करते समय सतर्क रहना चाहिए।







