
योजना बना कर भीड़ के द्वारा हिंदुओं पर खूनी हमले करने का रुझान अब तेजी से बढ़ रहा है।
सनातन 🚩समाचार🌎उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के गैंडास बुजुर्ग थाना क्षेत्र के पिपराराम गांव से अब एक क्रूर और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। इस मामले ने पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया है।घटना की शुरुआत 26 मई 2026 की रात लगभग 10 बजे हुई, जब स्थानीय निवासी राजू मौर्य ने गांव की गलियों में संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे मोहम्मद आसिफ खान को देखा। सुरक्षा की दृष्टि से राजू मौर्य ने जब उसे रोककर पूछताछ की, तो आसिफ ने इसे अपना अपमान समझा। उस समय विवाद के बाद ग्रामीणों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो गया था, जबकि तब आसिफ ने राजू मौर्य को अंजाम भुगतने की धमकी दी थी।

अगले दिन यानी 27 मई की सुबह मोहम्मद आसिफ खान ने अपने पिता वारिस अली, भाइयों साजिद खान, सलीम उर्फ सालिम अली, माजिद अली, आकिब और वाजिद के साथ मिलकर एक योजनाबद्ध तरीके से हमला करने की तैयारी की। ये सभी लोग लाठी, डंडे, लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से लैस होकर राजू मौर्य के घर जा पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए राजू मौर्य पर हमला कर दिया।राजू मौर्य को बचाने के लिए जब उनके परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंचे, तो हमलावरों ने उन पर भी बर्बरता से वार किए।
इस हमले में धनराज मौर्य के सिर पर लोहे की रॉड और लाठियों से गंभीर प्रहार किए गए, जिससे वे मरणासन्न हो गए। इसके अतिरिक्त हमले में मीना देवी, हीरालाल मौर्य, सोहनलाल मौर्य और आकाश मौर्य भी बुरी तरह घायल हुए। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित जान से मारने की धमकियां देते हुए वहां से फरार हो गए।गंभीर रूप से घायल धनराज मौर्य को इलाज के लिए पहले स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया।
वहां कई दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद आखिर शनिवार 30 मई 2026 को धनराज मौर्य ने दम तोड़ दिया। रविवार (31 मई 2026) सुबह जब धनराज मौर्य का शव पोस्टमार्टम के बाद एम्बुलेंस से पिपराराम गाँव पहुँचा, तो परिजनों के सब्र का बाँध टूट गया। मृतक के रोते-बिलखते बूढ़े माता-पिता, पत्नी और मासूम बच्चों को देखकर पूरे गाँव का कलेजा मुंह को आ गया। उन्मादियों की इस क्रूर हरकत के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और पीड़ित परिवार के सदस्य शव को लेकर बलरामपुर-बस्ती मार्ग पर उतर आए।
उन्होंने मुख्य सड़क के बीचों-बीच शव को रखकर चक्काजाम कर दिया और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा परिवार की सुरक्षा की मांग की। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन से सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आवागमन प्रभावित रहा। सूचना पर उपजिलाधिकारी मनोज कुमार सरोज, क्षेत्राधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह, गैंड़ास बुजुर्ग के प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार मिश्र तथा उतरौला के प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।







