ये एक अकाट्य सत्य है कि मानव स्वयं अपनी समस्त मानव जाति का शत्रु है।
सनातन 🚩समाचार🌎विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने मंगलवार दो मई 2026 को चेतावनी जारी की है कि इस साल जून से अगस्त के बीच एल नीनो के विकसित होने की संभावना अस्सी प्रतिशत तक है। इस पूर्वानुमान ने दुनियाभर में मौसम की बदलती चाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी का कहना है कि नवंबर तक एल नीनो के बने रहने की आशंका नब्बे प्रतिशत से अधिक है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह एल नीनो मध्यम से लेकर अत्यधिक शक्तिशाली हो सकता है जिससे दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, बाढ़ और भीषण हीटवेव जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ गया है।
भारत के मानसून पर भी इसका असर पड़ने के स्पष्ट संकेत हैं। मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान दक्षिण एशिया और विशेष रूप से मध्य भारत के विभिन्न इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। कृषि मंत्रालय ने इस संभावित सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए राज्यों को जिला स्तर पर आपातकालीन योजनाएं सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्री ने अधिकारियों से डिजिटल सलाह तंत्र को चुस्त-दुरुस्त करने को कहा है ताकि किसानों को समय रहते सही जानकारी मिल सके और वे फसलों को बचा सकें।
हालांकि एल नीनो को लेकर गंभीर आशंकाएं हैं लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उम्मीद अभी बाकी है। इसके पीछे दो मुख्य जलवायु कारक हैं जो राहत दे सकते हैं। पहला कारक इंडियन ओशन डाइपोल है जिसे हिंद महासागर का एल नीनो भी माना जाता है। यदि यह इस बार पॉजिटिव रहता है तो एल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक बेअसर कर सकता है। दूसरा कारक मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन है जो बादलों का एक गतिशील पैटर्न है। जब यह भारत के ऊपर सक्रिय होता है तो कमजोर मानसून के दौरान भी अच्छी बारिश करवा सकता है।
वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर के भीतर गर्मी का स्तर बहुत अधिक दर्ज किया है जो एल नीनो के विकास को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की प्रमुख सेलेस्टे साउलो ने सभी सरकारों को आगाह किया है कि वे संभावित रूप से मजबूत एल नीनो के लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार रहें। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से तप रही दुनिया पर एल नीनो अतिरिक्त दबाव डालेगा।
भारत में पहले से ही गर्मी ने विकराल रूप ले लिया है और कई राज्यों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग लगातार हीटवेव के अलर्ट जारी कर रहा है। विशेषज्ञों की राय में ग्लोबल वार्मिंग के चलते तापमान में वैसे ही बढ़ोतरी हो रही है और यदि एल नीनो और अधिक मजबूत हुआ तो गर्मी का दौर और भी लंबा तथा कष्टकारी हो सकता है। इससे जल संकट और बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी की संभावना है। प्रशासन को कृषि, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है ताकि चरम मौसम के दौरान नुकसान को कम किया जा सके।
इसके प्रभाव और बचाव:
हीट वेव का शरीर पर सीधा असर पड़ता है, जिससे डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), हीट स्ट्रोक (लू लगना), चक्कर आना और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बचाव के उपाय:
पानी पिएं: प्यास न होने पर भी पर्याप्त पानी पीते रहें। ओआरएस (ORS) या घर पर बने पेय जैसे लस्सी, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें।
बाहर निकलने से बचें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से बचें।
हल्के कपड़े: बाहर निकलते समय सूती, हल्के और ढीले कपड़े पहनें। सिर को टोपी, छाते या कपड़े से ढककर रखें।
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खान-पान: अधिक प्रोटीन वाले और बासी भोजन से बचें। ताजे फल और सब्जियां खाएं।







